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प्रश्न पूछना सीखने का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह सोच को एक विशिष्ट रूपरेखा देता है और अप्रत्याशित रहस्यों को खोलता है। चीज़ें जैसी हैं, वैसी कैसे-क्यों हैं, उन तथ्यों का पता लगाने से आत्मज्ञान मिलता है। जबकि सन्देह को अपने तक रखना सच्चाई से दूर, और जीवन, जो मूल्यवान अवसर दे रही है उनसे वंचित कर सकता है। लेकिन किस प्रकार के प्रश्न हमें पूछने चाहिए? साधू की बानी पुस्तक में, प्रसिद्ध साधु नित्यानन्द चरण दास ने युवाओं-वृद्धों द्वारा अक्सर पूछे गए – कर्म, धर्म बनाम अध्यात्म, मन, ईश्वर, भाग्य, जीवन का उद्देश्य, कष्ट, कर्मकांड, युद्ध आदि विषयों पर – सत्तर से अधिक प्रश्नों के उत्तर दिए। ये उत्तर अत्यधिक महत्वपूर्ण हैं जो सेल्फ़-डिस्कवरी और सेल्फ़-रियलाइज़ेशन में हमारी मदद के लिए हैं। -
तृतीय स्कंध की सुन्दरता इसमें सम्मिलित विविध विषयों तथा इसमें वर्णित महान व्यक्तित्वों के विस्मयकारी चरित्रों में निहित है । विषयों में सृजन, उपसृजन, समय, भ्रूणविज्ञान, पारिवारिक जीवन, सांख्य, भक्ति-योग, अष्टाङ्ग - योग, ज्ञान- योग, कर्म, संस्कृति, आध्यात्मिक जगत, भौतिक जगत और नरक सम्मिलित हैं । इन विषयों को विदुर, उद्भव, मैत्रेय, ब्रह्मा, कुमार, जय, विजय, स्वायंभुव मनु, देवहूति और कर्दम जैसे प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों की कथाओं, प्रार्थनाओं और संवादों में आपस में बुना गया । -
यह पुस्तक जीवन को देखने का एक नया दृष्टिकोण देती है। इसमें बताया गया है कि यह ब्रह्मांड एक बड़ी यूनिवर्सिटी की तरह है, जहाँ हर अनुभव हमें कुछ सिखाने आता है। किताब हमें सफलता की अपनी परिभाषा तय करने, चिंता की जगह परवाह करने, मन को संभालने और अपने शब्दों की शक्ति को समझने की सीख देती है। साथ ही यह सिखाती है कि समस्याएँ जीवन का हिस्सा हैं, लेकिन उनका आकार हमारे दृष्टिकोण से तय होता है। काम को पूजा की तरह करने, भीतर झाँककर ख़ुद को सुधारने और कठिन समय में भी दिल छोटा न करने का संदेश इस पुस्तक की मूल भावना है। -
"सनातन धर्म और हिन्दू धर्म के बीच क्या संबंध है? • मंत्र कैसे काम करते हैं? • हमारे जीवन की शृंखला के अंत में क्या है? • भक्ति योग में क्रिया और प्रतिक्रिया की शृंखला को किस प्रकार बाधित करता है? • मैं किसी गुरु की पहचान कैसे करूँ? हिंदू धर्म के सार की इस व्यापक और विस्तृत मार्गदर्शिका में इन प्रश्नों और इनके जैसे कई अन्य प्रश्नों का उत्तर स्पष्टता और सरलता के साथ-साथ हास्य का प्रयोग करते हुए दिया गया है। कृपामय दास ने पचास वर्षों तक विश्व भर में लोगों को सनातन धर्म की आध्यात्मिक संस्कृति की शिक्षा दी है। दशकों तक ऐसे ही प्रश्नों और संदेहों का सामना करने के बाद कृपामय दास ने इन्हें एकत्रित करके पाठकों के सामने इस पुस्तिका के माध्यम से उनके उत्तर प्रस्तुत किए हैं, जिसका उपयोग पाठक अपनी आध्यात्मिक यात्रा के दौरान किसी भी क्षण में कर सकते हैं।" -
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पुस्तकें सदियों से मनुष्य की जिज्ञासाओं के समाधान का माध्यम रहीं है। सही मार्गदर्शन के आभाव में आज हम देख रहे हैं कि सनातन या हिन्दू धर्म के विषय में लोग कई भ्रम और संशयों से घिरे हैं। श्रीमान प्रतीक देसाई द्वारा लिखित ''सनातन धर्म (संशय भंजन)", लोगों को सामान्य रूप से अध्यात्म, सनातन या हिंदू धर्म के बारे में सबसे पेचीदा, विवादास्पद और नियमित रूप से पूछे जाने वाले सवालों का जवाब देती है। यह पुस्तक हिंदू धर्म के बारे में लोगों की कई भ्रांतियों को दूर करके हिंदू धर्म के वास्तविक अर्थ और सार को प्रकट करती है। पुस्तक को प्रश्नोत्तर के रूप में बहुत ही स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत किया गया है ताकि हर कोई इसे समझ सके। पुस्तक में संबोधित कुछ प्रश्न हैं - 1) भगवान इतने सारे धर्म क्यों बनाते हैं जो हिंसा का कारण बनते हैं 2) जरूरतमंद और गरीबों को दान देने के बजाय भगवान को दान क्यों करें 3) यदि ईश्वर एक है तो क्या सभी मार्ग एक ही ईश्वर की ओर नहीं ले जाते? 4) भक्त, भगवान को आमने-सामने क्यों नहीं देख सकते? ... और भी बहुत कुछ ... -
‘मामेकं शरणं व्रज’ श्रील विेशनाथ चक्रवर्ती ठाकुर, श्रील बलदेव विद्या भूषण और अन्तर्राष्ट्रीय कृष्णभावनामृत संघ के संस्थापक-आचार्य, श्री श्रीमद् ए.सी. भक्तिवेदान्त स्वामी प्रभुपाद की टिप्पणियों पर आधारित है। सत्ताईस वर्षों के अध्ययन का फल, यह भगवद्-गीता की दार्शनिक प्रगति को समझने और समझाने का एक प्रयास है - श्लोक, अनुभाग और अध्याय एक साथ कैसे कैसे मेल खाते हैं। यह सिंहावलोकन कर लेने पर भक्तों को परामर्श देने, प्रबंधन करने और शिक्षा देने की सेवाएं, शास्त्रीय दृष्टि से सुगठित हो जाती हैं। अतः इसकी प्रासंगिकता व्यावहारिक प्रचार में भी है तथा गीता को हमारे अपने भक्तिमय जीवन में लागू करने में भी। -
गौर गोपाल दास, नवंबर की एक ठंडी सुबह में, अपने दोस्त राकेश अरोड़ा के बेटे की तीन दिन तक चलने वाली शादी की रस्मों में शामिल होने के लिए जैसलमेर पहुँचते है। वहीं उनकी मुलाकात अरोड़ा परिवार और होने वाली दुल्हन के परिवार से होती है। जैसे-जैसे शादी का दिन पास आता है, एक बिन बुलाया मेहमान अचानक सामने आ जाता है। वे दोनों परिवारों को तोड़ने की धमकी दे रहे उस तूफान को देखते हैं। अपने मेज़बान और उनके मेहमानों के साथ बातचीत के दौरान, अपनी सहज और शांत मौजूदगी के साथ, वे उनके दिलों में छिपी उन इच्छाओं और डरों को सामने लाते हैं जिन्हें वे लंबे समय से अनदेखा करते आ रहे थे। इसी बीच वे उन्हें संतुलित और समझदारी भरी सलाह देते हैं, और साथ ही अपनी जिंदगी के उतार-चढ़ावों से भरी यात्रा भी साझा करते हैं। - हर मंज़िल होगी आसान गौर गोपाल दास की निजी और गहरी बयानगी है एक ऐसी दिलचस्प किताब जो उन लोगों के लिए बदलाव का रास्ता पेश करती है, जो महत्वाकांक्षा और संतुष्टि, प्रयास और अस्तित्व के बीच फंसे हुए हैं। दिलचस्प संवादों, गहरी संवेदनशीलता और सौम्य ज्ञान के साथ, यह किताब हमें बताती है कि हमारी सोच ही हमारी वास्तविकता को आकार देती है। इसीलिए ज़रूरी है कि हम अपने ब्लाइंड स्पॉट्स को पहचानें और उनसे ऊपर उठना सीखें, और अपने भीतर वह करुणा विकसित करें जिसकी हमें ज़रूरत है, ताकि हम इस खूबसूरत और जटिल जीवन को बेहतर तरीके से जी सकें।